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कंप्यूटर वायरस क्या है और इसको ख़त्म करने का तरीका 

कंप्यूटर वायरस क्या है और इसको ख़त्म करने का तरीका

आज के युग में हम सब जानते हैं कि ज्यादातर लोग कंप्यूटर को चलाना जानते है और इस टेक्नोलॉजी को हर रोज अपनी ज़िंदगी में इस्तेमाल भी करते है। जैसे ऑफिस, स्कूल, बैंक, शॉपिंग स्टोर्स, आदि। लोग कंप्यूटर इस्तेमाल करते हैं और वायरस के बारे में हम सब जानते है। ये वायरस कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के लिए बहुत ही नुकसानदायक होते है। वायरस से हमारा कंप्यूटर ख़राब हो सकता है और हमारा इम्पोर्टेन्ट डाटा डिलीट भी हो सकता है।

 कंप्यूटर वायरस का इतिहास – History of Computer Virus in Hindi:

1947 में कंप्यूटर वायरस को सबसे पहले इस कंप्यूटर वीरयूस को कंप्यूटर इंजीनियर रोबर्ट थॉमस ने कंपनी में काम करते होते बनाया बनाया था। जिस कंपनी में थॉमस ने यह वायरस बनाया था उस कंपनी का नाम BBN टेक्नोलॉजी था। इस वायरस का नाम क्रीपर वायरस था और यह वायरस परमानेंट वायरस नहीं था और इस वायरस का मकसद सिर्फ दूसरी कंपनी ARPANET के मेनफ़्रेम को कंप्यूटर में इन्सर्ट या डिफेक्ट करना था । उसके बाद स्क्रीन पर message display होता था। “am creeper, catch me if you can” इसका हिंदी में यह मतलब है कि मैं creeper हूँ, मुझे पकड़ सकते हो तो पकड़ो। इस खतरनाक वायरस को सबसे पहले Elk Cloner ने track किया था। एलक क्लोनेर ने पहले apple कि सेकंड जेनरेशन के ऑपरेटिंग सिस्टम को फ्लॉपी डिस्क द्वारा इन्फेक्ट किया था और सबसे अहम बात यह है इस वायरस को 1982 में Richard Skrenta ने develop किया था।  जिस समय उसने इस वायरस को develop किया उस समय उसकी उम्र लगभग 16 साल थी। इस वायरस को सिर्फ प्रैंक करने के लिए ही डिज़ाइन किया गया था। अगर हम इस वायरस को कंप्यूटर में इन्सर्ट करे तो यह बहुत बुरे काम कर सकता है। मालिसियस प्रोग्राम (malicious programs) पर किसे भी यूज़र का कंट्रोल नहीं होता। 1983 में Fred Cohen ने मालिसियस प्रग्रामस को कंप्यूटर वायरस का नाम रख दिया और यह वायरस तब सामने आया जब acedemic पेपर में इस प्रोग्राम का नाम टाइटल में लिखा “computer  virus – “theory  and  experiments ” इसमें Fred colon ने इस वायरस के बारे में विस्तार रूप में जानकारी दी जैसे: यह क्या होता है और कैसे काम करता है।  

Computer Virus का क्या काम होता है ?

आपके कंप्यूटर में जितना भी यह आपके डाटा होता है कंप्यूटर वायरस आपके डाटा को डिलीट या corrupt भी कर देता है। वायरस बहुत ही खतरनाक होता है क्योंकि यह आपके कंप्यूटर की हार्ड डिस्क में save data (important files and data) को भी destroy कर सकता है। ईमेल अटैचमेंट से भी आपके कंप्यूटर का वायरस एक कंप्यूटर से दूसरे कंप्यूटर में ट्रांसफर हो सकता है और आपके कंप्यूटर को ख़राब भी कर सकता है। कंप्यूटर का वायरस आपके कंप्यूटर की स्पीड को ख़राब भी कर सकता है।

Malware क्या है ? What is Malware in Hindi

Malicious Program को malware के नाम से जाना जाता है। यह एक software प्रोग्राम है जो कंप्यूटर को नुकसान पहुंचा सकता है इस तरह के सॉफ्टवेयर को malicious software भी कहते है। इसको Malware के नाम से जाना जाता है | वायरस का कम्प्यूटर में आने का मुख्य कारण यह है कि आज कल सभी लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते है इसी कारण से भी आपके कंप्यूटर में वायरस आता है। इंटरनेट से जानकारी लेने के लिए कभी कभी हम कुछ ऐसी websites पर चले जाते है जो कि मालिसियस वेबसाइट होती है इससे हमारे डिवाइस ख़राब हो जाते है। फ्री के pirated software, games, films download करने से मैलवेयर वायरस ऑनलाइन तरीके से आपके कंप्यूटर में आ सकते है। Pendrive, CD, DVD से डाटा transfer करने से भी आपके कंप्यूटर वायरस एक computer से दूसरे कंप्यूटर में ट्रांफर हो जाता है। 

कंप्यूटर वायरस क्या है और इसको ख़त्म करने का तरीका

Malware के प्रकार (types of Malware)

Malware 3 प्रकार के होते है जैसे:-

  1. Virus 
  2. Worms 
  3. Trojan horse 

यह 3 वायरस अलग अलग तरह के होते है और यह तीनो अलग तरीके से कंप्यूटर को ख़राब करते हैं। इस आर्टिकल में हम आपको इन तीन वायरस के बारे में विस्तार रूप में समझाये गए। 

वायरस क्या होता है ? – What is Computer Virus in Hindi ?

इस आर्टिकल से आप यह बात तो अच्छी तरह से समझ गए होंगे के वायरस आपके कंप्यूटर की सभी फाइल्स और सॉफ्टवेयर को ख़राब कर देता है। हम आपको इस वायरस के बारे में एक example के तौर पर समजाते हैं :- मान लेते है कि आपके कंप्यूटर में Ms word की कोई फाइल है और इसी फाइल में वायरस भी है। तो यह वायरस आपके डाटा को डिलीट भी कर देता है और यह वायरस आपके डाटा को करप्ट भी कर सकता है। यह वायरस आपके वर्ड फाइल्स (word files) के सॉफ्टवेयर को भी करप्ट कर देता है। अगर आप इन infected files (इन्फेक्टेड फाइल्स) को शेयर करते है तो यह वायरस दूसरे सिस्टम को भी ख़राब कर देता है।  

कंप्यूटर वायरस के प्रकार – Types of computer virus:
  1. Boot Sector Virus:

इस प्रकार के वायरस मास्टर बूट रिकॉर्ड को इन्फेक्ट करते है और इसको सिस्टम में निकलना बहुत ही मुश्किल है। यह रिमूवेबल मीडिया के कारण कम्प्यूटर में आता है। 

  1. Direct Action Virus:

डायरेक्टर एक्शन वायरस को नॉन रेजिडेंट वायरस भी कहा जाता है। इनस्टॉल होने के बाद कंप्यूटर की मेमोरी में हिडन रहता है। यह वायरस ऐसी specific files  के साथ attach रहता है और इन्फेटेड करता है । 

  1. Resident Virus:

यह Resident Virus direct  action  virus (डायरेक्टर एक्शन वायरस) की तरह ही होता है और सिस्टम में इनस्टॉल हो जाता है और इसकी मुश्किल निकलना बहुत ही मुश्किल है। यह वायरस कंप्यूटर की ram में छिपे होते है। ऐसे वायरस को antivirus और anti – malware ढूंढ नहीं सकते।   

  1. Multipartite Virus:

Multipartite virus अलग अलग तरह कंप्यूटर को इन्फेक्ट करते है। यह वायरस बूट सेक्टर और एक्सेक्यूटबले फाइल्स दोनों को इन्फेक्ट करते है। 

  1. Polymorphic Virus:

एक traditional  antivirus  program के लिए इस तरह के वायरस को पहचानना बहुत ही मुश्किल है। इस की वजह यह है कि यह वायरस signature/pattern को बार बार बदलते रहते है और यह वायरस खुद को रिप्लिकेट करते हैं । इसका इस्तेमाल ज्यादातर साइबरक्रिमिनल करते है जो कि hackers होते है।  

  1. Overwrite Virus:

यह वायरस बहुत ही खतरनाक होते है और इसको पकड़ना और ढूढ़ना बहुत ही मुश्किल है। यह वायरस फाइल्स को इन्फेक्ट करता है और डिलीट भी कर देता है। इस तरह यह वायरस सिस्टम के डाटा और रिकॉर्ड को नष्ट कर देते है। users को वो सारी फाइल्स डिलीट करना चाहिए जितनी उस फाइल्स इन्फेक्टेड होई हो। इससे users का बहुत ज्यादा loss होता है। इन्हें वायरस को 2 नाम से जाना जाता है जिनके नाम यह है: Spacefiller Virus और Cavity Virus.

  1. File Infector Virus:

यह वायरस इन्फेक्टेड files के साथ attach  होती है। फाइल इंफेक्टर वायरस (File Infector Virus) सबसे पहले main फाइल्स को इन्फेक्ट करते है। कुछ फाइल प्रोग्राम (files programs) में अपने आप लोड हो जाते है और इसके साथ साथ वायरस भी लोड हो जाता है। इसका मुख्य कारण यह है के यह वायरस आपके सिस्टम में ईमेल (email) के ज़रिये आता है।  

  1. Macro Virus:

इसके नाम से ही पता चलता है यह वायरस macro Language Commands को सीधे टारगेट करता है| इनके सबसे पहले माइक्रोसॉफ्ट की फाइलस (files) आती है। ऐसे वायरस इस तरह से डिज़ाइन करते हैं, जिससे यह अपने खराब कोड को बड़ी आसानी से सही कोड में जोड़ देता है |

  1. Rootkit Virus:

रूटकिट वायरस ऐसा वायरस होता है जो के चुपके से इललीगल रूटकिट को हमारे कंप्यूटर सिरटेम में इनस्टॉल कर देता है। यह वायरस हैकर्स के लिए बहुत फ़ायदेमंद है क्योंकि यह वायरस हैकर्स की entry का काम करता है इससे हैकर आपके सिस्टम को अपने कंट्रोल में ले लेता है।

  1. System या Boot Record Infector Virus:

बूट रिकॉर्ड इंफेक्टर वायरस एक्सक्यूटेबले कोड को ख़राब कर देते है। यह वीरयूस USB Thumb Drives और Boot Sector को खराब कर देते हैं क्योंकि यह वायरस डिस्क के एक हिस्से में होता है और यह नाम के द्वारा ही पता लगता है। इस युग में यह वायरस अब देखने को नहीं मिलता क्योंकि आजकल के सिस्टम फ़िज़िक्स स्टोरेज (physical storage) पर निर्भर करते है। 

वार्म क्या होते हैं – What is Worms in Hindi ?

Worms एक प्रकार का वायरस होता है यह वायरस आपके कंप्यूटर सिस्टम में धीरे धीरे फ़ैल जाता है। अगर worm वायरस आपके कंप्यूटर में एक बार आ जाये तो यह वायरस आपके कंप्यूटर के पुरे सिस्टम की सभी फाइल्स की कॉपी बनाता है। और जैसे जैसे यह बढ़ता है वैसे ही यह आपके कंप्यूटर की स्पीड को स्लो कर देता है। अगर हम इन्फेक्टेड फाइल्स को दूसरे सिस्टम में शेयर करते है तो यह सही सिस्टम को भी ख़राब कर देता है। और इससे दूसरे सिस्टम में भी फाइल्स कॉपी होना शुरू हो जाती है और दूसरे सिस्टम की स्पीड को भी स्लो कर देता है। 

ट्रोजन हॉर्स क्या होता है – What is Trojan Horse in Hindi?

ट्रोजन हॉर्स वायरस (Trojan horse virus) बाकी सभी कंप्यूटर वायरस से खतरनाक मैलवेयर है। यह वायरस जब आपके सिस्टम में आता है तो आपको पता भी नहीं चलता।इस तरह के वायरस इंटरनेट के इस्तेमाल करने से आते हैं। मान लीजिये जब आप इंटरनेट का इस्तेमाल करते है और वहां आपको कुछ अद्वेर्तिसेमेन्ट्स आपकी स्क्रीन पर डिस्प्ले होती हैं जैसे कि- “Click here to win Laptop” आप इसको जितने के लिए इस पर क्लिक कर देते है ऐसा करने से आपके कंप्यूटर में Trojan Horse Malware आने शुरू हो जाते है। आपको पता भी नहीं चलता जब यह वायरस आपके सिस्टम में आता है और धीरे धीरे यह आपके पुरे सिस्टम को ख़राब कर देता है। Trojan Horse Malware नाम का वायरस इंटरनेट में बहुत सारे सॉफ्टवेयर में मौजूद होते है जैसे ही आप उन वेब्सीटेस पर विजिट करते है जिससे आप फ्री में games, movies डाउनलोड करते है तो यह वायरस डौन्लोडिंग कर ज़रिये अपने सिस्टम में आ जाता है और और धीरे धीरे आपके कंप्यूटर की स्पीड को स्लो कर देता है। जैसे ही यह वायरस आपके कंप्यूटर में आता है तो ऑटोमेटिकली और भी वायरस आपके कंप्यूटर में आ जाते है और आपके कंप्यूटर को ख़राब कर देते है।  

कंप्यूटर वायरस के लषण (Symptoms of computer virus in hindi):-

अगर आप यह जाना चाहते है कि आपका कंप्यूटर वायरस से इन्फेक्टेड है या नहीं तो मई आपको इसके कुछ signs बताने वाला है जिससे आप कन्फर्म जो जायेंगे के आपका कंप्यूटर वायरस है या नहीं। 

आपके कंप्यूटर की स्पीड स्लो हो जाएगी स्पीड स्लो होने के कारण आप पहले जैसे परफॉर्म (perform) नहीं कर सकते।

  • आपके कंप्यूटर की स्क्रीन पर अलग अलग तरीके के Pop Ups आएंगे।
  • आपके कंप्यूटर में कुछ programs अपने आप परफॉर्म करने लगते है।
  • आपके system में कुछ फाइल्स (files) अपने आप डुप्लीकेट होने लगती है।
  • वायरस के कारण कुछ ऍप्लिकेशन अपने आप इनस्टॉल हो जाती है।
  • कुछ फाइल्स अपने आप डिलीट या नष्ट हो जाती है। 
  • कंप्यूटर की hard drive तेज होने से आपके सिस्टम की हार्ड ड्राइव की आवाज़ आने लगती है।  

अगर आपके कंप्यूटर के सिस्टम में यह लछ्ण दिखाई दे तो आपको यह समझ  जाना चाहिए कि आपका सिस्टम वायरस से इन्फेक्टेड है इसलिए आपको लेटेस्ट एंटीवायरस (latest antivirus) खरीद कर इनस्टॉल करना चाहिए और फिर इसको स्कैन करना चाहिए यह आपके सिस्टम में से वायरस जो डिलीट करने में मदद करता है। 

कैसे अपने कंप्यूटर को Worms, Virus और Malware से बचाएं?

इस topic में मैं आपको कुछ ऐसे टिप्स बताऊँगा जो आपके सिस्टम को worm, virus, और malware से बचाने में मदद करता है।

आपको क्या करना चाहिए:-

  • आपको अपने कंप्यूटर में anti virus इनस्टॉल करना चाहिए और इसको हमेशा समय समय पर update करना चाहिए। एंटी वायरस आपके कंप्यूटर में से वायरस को रिमूव करने में मदद करता है।  
  • अगर आपको कोई ईमेल आती है और मेल भेजने वाले के बारे में कोई जानकारी नहीं है तो उस ईमेल को कभी नहीं open करना चाहिए।  
  • आपको कभी भी Unauthorized websites का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इन वेब्सीटेस से कभी भी web series, games, songs, movies, software डाउनलोड नहीं करना चाहिए। 
  • अगर आप कोई भी चीज इंटरनेट से डाउनलोड करते है या फिर अपने किसे दोस्त से pendrive से लेते है तो आपके सिस्टम में पहले से ही एंटी वायरस उपलब्ध होना चाहिए इससे आप sharing documents, movies, songs आदि को स्कैन कर सकते है। मूवीज में वायरस आसानी से आ सकता है और इसे शेयर करने से वायरस एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस में शेयर हो सकता है । एंटी वायरस आपके सिस्टम में आने वाले वायरस को रोक सकता है जिससे आपके सिस्टम में वायरस नहीं आएगा। 
  • बिना स्कैन किये कभी भी pendrive, DVD, CD आदि का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।  
  • वेबसाइट पर विजिट करते समय आपको इस बात पर ध्यान जरूर देना चाइये कि आप जो वेबसाइट use कर रहे हो वह वेबसाइट रजिस्टर है या फिर मशहूर है। एक बात जरूर याद रखे कि अगर आपको उसके बारे में जानकारी नहीं है तो आप कभी भी उस लिंक पर क्लिक न करें इससे आपको बहुत बड़ी परेशानियाँ का सामना करना पड सकता है । 

आपको क्या नहीं करना चाहिए:-

  • अगर आपको कोई भी ईमेल आती है और उसमे कोई अटैचमेंट भी दी गयी है उसके साथ साथ आपको ईमेल भेजने वाले की कोई जानकारी नहीं है तो याद रखे उस ईमेल अटैचमेंट को कभी न खोलें और ना ही उस अटैचमेंट को डाउनलोड करें। 
  • हमारे सिस्टम में बहुत सारी फाइल्स ऐसी होती है जैसे कि executable file, document और Spreadsheet यह सभी को बिना स्कैन किये खोलने की कोशिश ना करे। 
  • इंटरनेट पर बहुत सारी ऐसी advertisements अद्वेर्तिसेमेन्ट्स उपलब्ध होती है जो आपको क्लिक करने के लिए कुछ offers डिस्प्ले करती है जिससे यूज़र उस वेबसाइट पर क्लिक करें। इससे आपके सिस्टम में Malware आने का खतरा हो सकता है इसी कारण कंप्यूटर सिस्टम ख़राब हो सकता है और इससे आपके कंप्यूटर को कोई हैक भी कर सकता है।  

इस आर्टिकल से अपने क्या सीखा ?

मुझे पूरी उम्मीद है इस आर्टिकल से आपको बहुत कुछ सिखने को मिला होगा जैसे कि कंप्यूटर वायरस क्या होता है ? यह वायरस कैसे आया और यह वायरस कितने तरह के होते है? इस वायरस को रोकने के लिए क्या करना चाहिए और क्या नहीं करने चाहिए। कुछ वेब्सीटेस ऐसी होती है जो बहुत advertisements दिखती है यह advertisements आपको किसी गिफ्ट और लाटरी के साथ लिंक होती है ऐसी advertisements से यूज़र उत्शहित हो जाते है जिससे वायरस आपके डिवाइस में आसानी से आ सकता है। और बिना स्कैन किये कोई भी pendrive, CD को स्कैन करके ही इस्तेमाल करना चाहिए। इस आर्टिकल में आपने एंटी वायरस के बारे में भी सीखा है जो के आज के युग में बहुत अहम है इससे हम फाइल्स (files) को स्कैन करके वायरस को मिटा सकते है।    

 

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