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ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है? इसके प्रकार, कार्य और आवश्यकता ।

ऑपरेटिंग सिस्टम क्या है? इसके प्रकार, कार्य और आवश्यकता ।

ऑपरेटिंग सिस्टम एक सॉफ्टवेयर होता है जो user और कंप्यूटर के बीच interface का कार्य करता है । छोटे रूप में ऑपरेटिंग सिस्टम को OS कहा जाता है । ऑपरेटिंग सिस्टम एक ऐसा कंप्यूटर प्रोग्राम है जो और कंप्यूटर प्रोग्रामों का संचालन करता है । ऑपरेटिंग सिस्टम एक ऐसा environment त्यार करता है, जिसके द्वारा हम कंप्यूटर की बात और कंप्यूटर हमारी बात समझता है । कंप्यूटर सिर्फ बाइनरी डिजिट को ही समझता है।  इसलिए ऑपरेटिंग सिस्टम हमारे (user) द्वारा टाइप किए गए data को machine language में कन्वर्ट करके कंप्यूटर को भेजता है और फिर कंप्यूटर हमें आउटपुट देता है । कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम के बिना एक निर्जीव वस्तु के समान है। ऑपरेटिंग सिस्टम के बिना कंप्यूटर पर काम करना नामुमकिन है । ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर के डिवाइस जैसे इनपुट और आउटपुट को भी मैनेज करता है । ऑपरेटिंग सिस्टम ऐसा software होता है जो बहुत से instructions के समूह से मिलकर बनता है ।

जैसे कि ऑपरेटिंग सिस्टम एक सॉफ्टवेयर होता है । अब आप जानना चाहेंगे कि सॉफ्टवेयर क्या होता है और इसके कितने प्रकार होते हैं-

सॉफ्टवेयर क्या है? (What is software?)

सॉफ्टवेयर प्रोग्राम्स का set होता है जो कंप्यूटर को विशेष कार्य करने के लिए सक्षम बनाता है । यह प्रोग्राम सी (C) सी प्लस प्लस (C++), जावा (java), डॉट नेट (.net) आदि लैंग्वेज (language) में होते हैं, जिनको कंप्यूटर आसानी से समझ सकता है। हम सॉफ्टवेयर के बिना कंप्यूटर को यूज नहीं कर सकते क्योंकि सॉफ्टवेयर कंप्यूटर का एक बहुत जरूरी हिस्सा होता है।

सॉफ्टवेयर के प्रकार 

सॉफ्टवेयर कई प्रकार के होते हैं । हर एक सॉफ्टवेयर का अपना काम होता है । मान लीजिए आपने वीडियो को play करना है तो आप वीडियो प्लेयर (video player) को ही यूज करेंगे क्योंकि जिस सॉफ्टवेयर को आप यूज कर रहे हैं उसको उस काम के लिए ही बनाया गया होता  है ।

सॉफ्टवेयर कितने प्रकार के होते हैं?

 सॉफ्टवेयर को उसके  कार्यों के अनुसार तीन  भागों  में बांटा गया है –

  •         सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software)
  •         एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Application Software)
  •         यूटिलिटी सॉफ्टवेयर( Utility Software)

सॉफ्टवेयर को उनके कार्यों के अनुसार सिस्टम सॉफ्टवेयर , एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर और यूटिलिटी सॉफ्टवेयर तीन  भागों में बांटा गया है। आगे हम जानते हैं कि एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर, यूटिलिटी सॉफ्टवेयर और सिस्टम सॉफ्टवेयर क्या है और किस काम के लिए यह सॉफ्टवेयर use किये जाते है use किये जाते है ।

सिस्टम सॉफ्टवेयर (System software) 

सिस्टम सॉफ्टवेयर ऐसे सॉफ्टवेयर होते हैं जिनके बिना कंप्यूटर को चलाना असंभव है । सिस्टम सॉफ्टवेयर ऐसे कंप्यूटर प्रोग्राम होते हैं जो कंप्यूटर हार्डवेयर (Hardware) और एप्लीकेशन सिस्टम (Application system) को  चलाने के लिए डिजाइन किए जाते हैं । जब भी आप कोई सॉफ्टवेयर पर काम करते हैं, उस काम को करने के लिए सिस्टम सॉफ्टवेयर आप की सहायता करता है । कंप्यूटर में MSDos, Windows, UNIX, Windows98, Windows XP, Windows net सारे सिस्टम सॉफ्टवेयर है, जिनके बिना कंप्यूटर पर काम कर पाना असंभव है।

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर (Application software) 

एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर ऐसे सॉफ्टवेयर होते हैं जो किसी उद्देश्य को पूरा करने के लिए बनाए जाते हैं । जैसे कि MS Office, MS Word, MS Excel, MS Paint, Powerpoint, Notepad, Media Player सारे एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर है, जिनका उपयोग हम किसी विशेष कार्य को पूरा करने के लिए करते हैं। जैसे MS Office एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर में हम सिर्फ ऑफिशियल काम कर सकते हैं । नोटपैड एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर का उपयोग लिखने वाले कामों में किया जाता है ।  मीडिया प्लेयर सॉफ्टवेयर की मदद से हम वीडियो देख सकते हैं । एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर के बिना हम कंप्यूटर पर कोई काम नहीं कर सकते।  इसलिए एप्लीकेशन सॉफ्टवेयर कंप्यूटर के लिए बहुत ही उपयोगी होते हैं।

यूटिलिटी सॉफ्टवेयर (Utility Software)

यूटिलिटी सॉफ्टवेयर ऐसे सॉफ्टवेयर होते हैं जो हमारे कंप्यूटर को सुरक्षा प्रदान करते हैं । जो सॉफ्टवेयर हमारे कंप्यूटर की सुरक्षा के लिए डिजाइन किए जाते हैं, वह यूटिलिटी सॉफ्टवेयर कहलाते हैं । यूटिलिटी सॉफ्टवेयर ऐसे सॉफ्टवेयर होते हैं जो कंप्यूटर को रिपेयर करके उसके काम करने की क्षमता को बढ़ाते हैं। इसलिए यूटिलिटी सॉफ्टवेयर को सर्विस प्रोग्राम भी कहा जाता है । जैसे एंटीवायरस का काम हमारे कंप्यूटर को वायरस से बचाना होता है तो इस एंटीवायरस को यूटिलिटी सॉफ्टवेयर कहा जाता है।

ऑपरेटिंग सिस्टम के कार्य

ऑपरेटिंग सिस्टम द्वारा कौन-कौन से कार्य किए जाते हैं, उनके बारे में हम नीचे विस्तार से जानते है-

प्रोसेसर मैनेजमेंट (Processor management) :- हम कंप्यूटर में जो भी काम करते हैं, उसे प्रोसेस कहा जाता है।  जैसे कि हमने कंप्यूटर पर किसी song को play किया।  यह सब काम प्रोसेस से होता है।  इन सभी प्रोसेस को मैनेज करने का काम ऑपरेटिंग सिस्टम करता है । CPU को कब किस प्रोग्राम की जरूरत है और जरूरत खत्म होने के बाद उस प्रोग्राम को deallocate करने का काम ऑपरेटिंग सिस्टम करता है।

डिवाइस मैनेजमेंट (Device management) :- ऑपरेटिंग सिस्टम डिवाइस के बारे में पूरी जानकारी रखता है । किस प्रोग्राम को कब कौन सी डिवाइस किस समय में दी जाए इसके बारे में ऑपरेटिंग सिस्टम पूरी जानकारी रखता है।

मेन मेमोरी मैनेजमेंट (Main memory management) :- ऑपरेटिंग सिस्टम प्राइमरी मेमोरी (primary memory) को मैनेजमेंट करने का काम करता है । जैसे कि हम कोई काम करते हैं तो उस काम को मेन मेमोरी में ले लिया जाता है।  किसको कितनी स्पेस एलोकेट (allocate) करनी है यह काम ऑपरेटिंग सिस्टम करता है । ऑपरेटिंग सिस्टम इस बात की भी पूरी जानकारी रखता है कि मेमोरी के किस भाग का इस्तेमाल किस प्रोग्राम ने कब और कितना करना है ।

फाइल मैनेजमेंट (File management) :- फाइल को मैनेजमेंट करने का काम ऑपरेटिंग सिस्टम करता है।  किसी भी फाइल को आसानी से ढूंढ कर उसका प्रयोग  करने के लिए हम फाइल को फोल्डर बनाकर उसके अंदर रखते हैं । किसी फाइल को कब बनाया है, फाइल का साइज कितना है, किस यूजर ने इस फाइल को बनाया है, इसके बारे में पूरी information ऑपरेटिंग सिस्टम ट्रैक करता है । ऑपरेटिंग सिस्टम किसको कितना resource मिलेगा इसके के बारे में भी डिसाइड करता है ।

नेटवर्क मैनेजमेंट (Network Management) :- कंप्यूटर में जितने भी नेटवर्क  से संबंधित कार्य होते हैं, उन कार्यों को भी ऑपरेटिंग सिस्टम करता है । कंप्यूटर में नेटवर्क को कनेक्ट करना और दो कंप्यूटर को आपस में जोड़ने का काम भी ऑपरेटिंग सिस्टम द्वारा किया जाता है ।

हार्डवेयर मैनेजमेंट (Hardware management) :- सभी हार्डवेयर डिवाइस को ऑपरेटिंग सिस्टम मैनेज करता है जैसे कि कीबोर्ड, माउस, मनीटर जैसी डिवाइजर्स को कैसे काम करना है, इस काम को करवाने का काम भी ऑपरेटिंग सिस्टम करता है ।

सुरक्षा मैनेजमेंट (Security management) :- आपके कंप्यूटर में जितने भी प्रोग्राम है, उन सब की सिक्योरिटी का काम ऑपरेटिंग सिस्टम करता है । ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर में सभी डाटा को अलग अलग रखता है । कंप्यूटर में मौजूद DATA  एक दूसरे के बीच में मिक्स ना हो जाए, इनकी सिक्योरिटी का भी ऑपरेटिंग सिस्टम पूरा ध्यान रखता है ताकि कोई भी व्यक्ति आपके कंप्यूटर में स्टोर data को नष्ट ना कर सके।

ऑपरेटिंग सिस्टम की  आवश्यकता 

ऑपरेटिंग सिस्टम की आवश्यकता कब और क्यों पड़ती है, इसके बारे में हम आगे जानते हैं-

* ऑपरेटिंग हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर के बीच में तालमेल बनाए रखता है।

* कंप्यूटर पर किसी भी कार्य को करने के लिए ऑपरेटिंग सिस्टम अवश्य है क्योंकि ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर में किसी भी एप्लीकेशन प्रोग्राम को चलाने के लिए प्लेटफॉर्म प्रदान करता है।

* हम कई प्रोग्राम एक साथ एक ही समय में ऑपरेटिंग सिस्टम की मदद से चला सकते हैं।

* ऑपरेटिंग सिस्टम की मदद से कंप्यूटर और user के बीच में  लिंक बनाया जाता है  ताकि user हर एप्लीकेशन प्रोग्राम में ठीक तरह से काम कर ले और उसने यूजर  जरूरी output मिल सके।

* User जरूरी data अच्छी तरीके से फाइल में Save कर सकें , इसके लिए भी ऑपरेटिंग सिस्टम फाइल मैनेजमेंट में user की मदद करता है।

इस आर्टिकल में हमने आपको बताया की ऑपरेटिंग सिस्टम क्या होता है, इसके कितने प्रकार होते हैं ,यह कौन कौन से कार्य करता है और इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी इसके बारे में बुहत easy भाषा में विस्तार से बताया है। मुझे उम्मीद है कि आपको इनके  बारे में काफी नॉलेज हुई होगी ।

 

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