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बुद्ध पूर्णिमा कब और क्यों मनाई जाती है?

बुद्ध पूर्णिमा कब और क्यों मनाई जाती है?

जैसे कि आप सभी जानते हैं कि जितने भी महापुरुष, गुरु, संत महात्मा हुए हुए हैं उनके जन्मदिन वाले दिन हो उनके भक्त एक त्यौहार की तरह मनाते हैं। जैसे गुरुओं के प्रकाश दिवस गुरपुरब के तौर पर मनाए जाते हैं । शिव जी के जन्मदिन को शिवरात्रि के तौर पर मनाया जाता है । कृष्ण कन्हैया जी के जन्मदिन को जन्माष्टमी के तौर पर मनाया जाता है । यीशु मसीह के जन्मदिन को क्रिसमस के तौर पर मनाया जाता है और इसी तरह महात्मा बुद्ध जी के जन्मदिन को बुद्ध पूर्णिमा के तौर पर मनाया जाता है।

बुद्ध पूर्णिमा कब मनाई जाती है ?

बुद्ध पूर्णिमा वैशाख मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है क्योंकि इसी दिन भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था और इसी दिन उनको  ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। इसी दिन उनका निधन हुआ था। भगवान बुध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और निधन तीनों वैशाख की पूर्णिमा के दिन हुए थे। इसीलिए इस दिन को बुद्धपूर्णिमा के तौर पर मनाया जाता है । इस दिवस को बुद्ध जयंती के तौर पर भी मनाया जाता है ।

गौतम बुद्धका जन्म कब और कहां हुआ था?

गौतम बुद्ध का जन्म 563 ईसा पूर्व को लुंबिनी वन में हुआ था । गौतम बुद्ध जी के बचपन का नाम सिद्धार्थ गौतम था।

माता पिता 

गौतम बुद्ध की माता जी का नाम महामाया और पिताजी का नाम शुद्धोधन था । उनके पिता जी क्षत्रिय शाक्य  कुल के राजा थे। गौतम बुद्ध जी के जन्म के 7 दिन बाद ही उनकी माता महामाया जी का निधन हो गया था । फिर गौतम बुद्ध जी का पालन पोषण उनकी मौसी प्रजापति गौतमी में किया था ।

महात्मा बुद्ध जी का जीवन परिचय 

आप में से बहुत से लोग ऐसे होंगे जो गौतम बुद्ध जी के जीवन बारे ज्यादा कुछ नहीं जानते । आज हम गौतम बुद्ध जी के जीवन के बारे में विस्तार से जानते हैं । गौतम बुद्ध जी के जन्म के 7 दिन बाद ही उनके माता जी का निधन हो गया था । बचपन से ही गौतम बुद्धि जी के मन में बहुत करुणा थी । वह किसी का भी दुख नहीं दे सकते थे । बचपन में जब वह खेलते थे तो जानबूझकर हार जाते थे, क्योंकि वह किसी को हराकर दुखी नहीं देख सकते थे। एक बार की बात है सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध) और उनका चचेरा भाई जंगल में गए थे । वहां उन्होंने शिकारी द्वारा घायल किया हुआ हंस मिला । हंस दर्द से तड़प रहा था । सिद्धार्थ से उसका दर्द देखा नहीं गया । उन्होंने तुरंत हंस को अपनी गोद में उठा लिया । फिर उन्होंने हंस का तीर निकाला और उसे पानी पिलाया । सिद्धार्थ का चचेरा भाई कहने लगा कि हंस उसे दो क्योंकि उसने हंस का शिकार किया है, परंतु सिद्धार्थ ने उसे हंस देने से मना कर दिया । फिर देवदत्त ने सिद्धार्थ की शिकायत राजा शुद्धोधन से की । राजा ने सिद्धार्थ से कहा कि तुम देवदास हो हंस क्यों नहीं दे रहे  ।

सिद्धार्थ ने कहा कि पिताजी देवदत्त ने हंस को तीर मारकर घायल किया था और मैंने उसका तीर निकालकर उसके प्राण बचाए हैं । इसलिए हंस मेरा ही होना चाहिए । फिर राजा ने कहा कि तुम ठीक कह रहे हो क्योंकि मारने वाले से बचाने वाला ही बड़ा होता है । फिर राजा ने हंस सिद्धार्थ को दे दिया । बचपन से ही सिद्धार्थ का मन करुणा से भरा रहता था । इसलिए उनके पिता ने उनकी प्रवृत्ति बदलने के लिए उनका विवाह यशोधरा नाम की एक सुंदरी से करा दिया। यशोधरा ने राहुल नाम के एक पुत्र को जन्म दिया । विवाह और पुत्र जन्म के बाद भी सिद्धार्थ का मन गृहस्थी में ना लगा। एक दिन सिद्धार्थ सैर करने के लिए गए । रास्ते में उन्होंने एक रोगी को देखा । थोड़ा और आगे गए तो उन्होंने एक बूढ़े व्यक्ति को देखा । जब वह थोड़ा और आगे गए तो उन्होंने एक मृतक व्यक्ति को देखा । यह देख कर उनका मन विचलित हो गया । वह सोचने लगे कि एक दिन मैं भी बूढ़ा हो जाऊंगा और फिर मर जाऊंगा ।

फिर आगे जाकर उन्होंने एक सन्यासी को देखा । जिसको देखकर उन्होंने भी सन्यास लेने का  मन बना लिया । फिर एक दिन वह अपना घर त्याग कर वन में रहने लगे । वह वन में कठोर तपस्या करते थे । वह पूरा दिन तपस्या में लीन रहते थे । वह  अपने खाने-पीने का ध्यान नहीं रखते थे । ऐसे भूखे तपस्या करने से उनका शरीर दुर्लभ हो गया था ।

ज्ञान की प्राप्ति 

कठोर तपस्या करने के बाद अंत में वह बिहार के गया नाम स्थान पर पहुंचे । वहां एक पेड़ के नीचे बैठकर वह तपस्या करने लगे । आखिर एक दिन उसी पेड़ के नीचे उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई । जब उनको ज्ञान की प्राप्ति हुई तब वह सिद्धार्थ से गौतम बुद्ध बन गए । जिस पेड़ के नीचे उनको ज्ञान की प्राप्ति हुई थी वह पेड बोधि वृक्ष के नाम से प्रसिद्ध हुआ ।

गौतम बुद्ध जी द्वारा दिए गए अनमोल उपदेश

1) महात्मा बुद्ध जी कहते थे कि बुराई का रहना भी अवश्य होता है, क्योंकि अगर बुराई होगी तो ही अच्छाई उसके ऊपर अपनी पवित्रता कायम कर सकेगी ।

2) महात्मा बुद्ध जी के अनुसार बुराई को अच्छाई से और झूठे व्यक्ति को सच्चे व्यक्ति की सच्चाई से ही जीता जा सकता है ।

3) जो व्यक्ति अपने मन पर काबू करके उसे शांत कर लेता है, वह व्यक्ति दुख तकलीफों से मुक्त हो जाता है ।

4) जो व्यक्ति किसी का बुरा नहीं करता और प्रभु की भक्ति करता है और अपने जीवन को समझदारी से जीता है, उस व्यक्ति को मृत्यु से भी डर नहीं लगता ।

5) जिस व्यक्ति को ज्ञान नहीं होता, वह एक बैल की तरह होता है । ज्ञानी व्यक्ति आकार में बढ़ता है ज्ञान में नहीं ।

6) जिन व्यक्तियों को सच्चे धर्म का ज्ञान नहीं होता, वह जीवन मृत्यु के चक्कर से कभी बाहर नहीं आते ।

7) जीवन की असली खुशी सब कुछ प्राप्त कर लेने से नहीं होती, बल्कि सब कुछ अर्पित करने से होती है ।

8) हर व्यक्ति अपने स्वास्थ्य और अपनी बीमारी के लिए खुद जिम्मेवार होता है ।

9) हमेशा समझदार लोगों के साथ ही रहना चाहिए क्योंकि मूर्खों के साथ रहने से तो अकेले रहना अच्छा होता है ।

10) किसी जीव को कष्ट नहीं देना चाहिए और ना किसी को मारना चाहिए । खुद भी ऐसा काम करें और दूसरों को भी ऐसा  काम करने से मना करें ।

11) ज्यादा इच्छाएं ना रखें क्योंकि व्यक्ति की इच्छाएं कभी पूरी नहीं होती क्योंकि एक इच्छा के पूरे होने के बाद दूसरी इच्छा जन्म ले लेती है ।

12) अगर थोड़े से आराम का त्याग करने से बड़ी खुशी मिल सकती है तो एक समझदार व्यक्ति को थोड़ा सा आराम त्याग कर बड़ी खुशी प्राप्त कर लेनी चाहिए ।

13) लोग यह नहीं जानते कि उनका अंत यहीं पर होना है, जो लोग इस सत्य को जान लेते हैं, उनके दुख तकलीफ और झगड़े खत्म हो जाते हैं ।

14) विश्वास के बिना आप किसी कार्य में सफल नहीं हो सकते । इसलिए धर्म को पाने के लिए विश्वास बहुत जरूरी है ।

15) हमें अपनी गलतियों की सजा गलती करने के तुरंत बाद मिले ना मिले परंतु समय के साथ कभी ना कभी इस गलती की सजा अवश्य मिलती है ।

बुद्ध पूर्णिमा क्यों मनाते हैं?

भारत में बहुत से त्योहार मनाए जाते हैं । इसी तरह वैशाख पूर्णिमा भी मनाया जाता है । वैशाख पूर्णिमा को बुद्धपूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है । यह गौतम बुद्ध की जयंती उनके निर्वाण दिवस के रूप में पूरे देश में धूमधाम से मनाई जाती है । वैशाख  पूर्णिमा के दिन हीं महात्मा बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था । इसी दिन ही उनका जन्म और निधन भी हुआ था । यह बुद्धपूर्णिमा भगवान बुद्ध के भक्तों के लिए एक बहुत बड़ा त्योहार होती है । इसी दिन भगवान बुद्ध ने सत्य की खोज करके लोगों को उपदेश दिए थे । उनके उपदेशों को याद करने के लिए बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाती है । इस दिन भगवान बुद्ध के अनमोल उपदेशों को उनके भक्तों में सुनाया जाता है । इसी दिन ज्ञान प्राप्ति के बाद वह सिद्धार्थ से गौतम बुद्ध बने थे । हिंदुओं के अनुसार गौतम बुद्ध को विष्णु का नौवां अवतार माना जाता है । इसलिए हिन्दू धर्म के लोगो की लिए बुद्ध पूर्णिमा का खास महत्व है ।

बुद्धपूर्णिमा को कैसे मनाया जाता है 

पूर्णिमा का मुख्य उत्सव स्थान बोधगया है । बोधगया गौतम बुद्ध के जीवन से संबंधित पवित्र तीर्थ स्थल है । बुद्ध बोधगया बिहार के गया जिले का एक छोटा सा शहर है । बुद्ध पूर्णिमा के दिन बड़ी संख्या में बुद्ध भगत महात्मा बुद्ध को श्रद्धांजलि देने के लिए इकट्ठा होते हैं । इस दिन लोग अपने घरों में मोमबत्तियां और दीपक जलाते हैं । इस दिन बुद्ध भगत सफेद कपड़े पहनते हैं । इस दिन बुद्ध भगत स्नान करते हैं । इस दिन बुद्ध भगत महाबोधि वृक्ष जिसे पीपल का वृक्ष भी कहा जाता है, उसकी पूजा करते हैं । जो लोग मांस खाते हैं, वह बुद्ध पूर्णिमा के दिन मांस का सेवन नहीं करते । घरों में मीठे पकवान बनते है । इसी दिन में भगवान बुद्ध के उपदेशों को याद किया जाता है और उनको अपने जीवन में अपनाने की कोशिश प्रेरणा ली जाती है ।

वैशाख पूर्णिमा के दिन सावधानियां 

1) बुद्ध पूर्णिमा के दिन गरीब और जरूरतमंद लोगों की सहायता अवश्य करें ।

2) इस दिन घर में शांति बनाए रखें ।

3) अपने गुस्से पर काबू रखें किसी भी व्यक्ति को अपशब्द ना बोलें।

4) इस बात का ध्यान रखें कि आप किसी का अपमान ना करें औरों को भी किसी का अपमान करने ना दें ।

5) इस दिन मास का सेवन ना करें ।

6) आप झूठ ना बोले और दूसरों को भी झूठ बोलने से रोके ।

मुझे उम्मीद है कि आप सभी को बुद्ध पूर्णिमा क्या है और इसे क्यों मनाया जाता है, इसके बारे में काफी ज्ञान प्राप्त हुआ होगा।

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